What is Article 371 of Indian Constitution in Hindi - संविधान का अनुच्छेद 371 क्या है?

संविधान का अनुच्छेद 371 क्या है? - अनुच्छेद 370 के अलावा अनुच्छेद 371 में कई राज्यों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं. संविधान के भाग 21 में बनाए गए अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष प्रावधानों में अनुच्छेद 371 भी शामिल है. इसमें शामिल 371, 371 ए, 371 बी, 371 सी, 371 डी, 371 ई, 371एफ, 371 जी, 371 एच, 371 आई और 371 जे शामिल हैं

What is Article 371 of Indian Constitution in Hindi - संविधान का अनुच्छेद 371 क्या है?

आर्टिकल 371: महाराष्ट्र और गुजरात में आर्टिकल 371 लागू है। इस आर्टिकल के तहत वहां के राज्यपाल को कुछ विशेष अधिकार हासिल है। महाराष्ट्र के राज्यपाल विदर्भ और मराठवाड़ा में अलग से विकास बोर्ड बना सकते हैं। इसी तरह गुजरात के राज्यपाल भी सौराष्ट्र और कच्छ में अलग विकास वोर्ड बना सकते हैं। टेक्निकल एजुकेशन, वोकेशनल ट्रेनिंग और रोजगार के लिए भी राज्यपाल Special arrangement कर सकते हैं।

आर्टिकल 371 के तहत कोई भी व्यक्ति जो हिमाचल प्रदेश से बाहर का है वह राज्य में एग्रीकल्चरल लैंड (खेती के लिए जमीन) नहीं खरीद सकता हैं

आर्टिकल 371A: इसके तहत नागालैंड राज्य को 1949  और 1963 में तीन विशेष अधिकार दिए गए थे

  • पहला: Indian parliament का कोई कानून नागा लोगों के सांस्कृतिक और धार्मिक (Cultural and religious) मामलों में लागू नहीं होगा
  • दूसरा: नागा लोगों के प्रथागत (Customary) क़ानूनों और परम्पराओं को लेकर Indian parliament का कानून और supreme court का कोई order लागू नहीं होगा
  • तीसरा: नागालैंड में जमीन और संसाधन (Resources) किसी गैर नागा को स्थांतरित नहीं किया जा सकेगा। आर्टिकल 371A के तहत नागालैंड का नागरिक ही वहां जमीन खरीद सकता है. देश के अन्य राज्यों के व्यक्ति को नागालैंड में जमीन खरीदने का अधिकार नहीं है.

आर्टिकल 371D आंध्र प्रदेश और तेलंगाना: इन राज्यों के लिए राष्ट्रपति के पास यह अधिकार होता है कि वह राज्य सरकार को आदेश दे कि किस जॉब में किस वर्ग के लोगों को नौकरी दी जा सकती है. इसी तरह educational institutions में भी राज्य के लोगों को बराबर हिस्सेदारी या आरक्षण मिलता है. राष्ट्रपति नागरिक सेवाओं से जुड़े पदों पर नियुक्ति से संबंधित मामलों को निपटाने के लिए हाईकोर्ट से अलग ट्रिब्यूनल बना सकते हैं.

आर्टिकल 371F सिक्किम: इसके तहत सिक्किम के पास पूरे राज्य की जमीन का अधिकार है, चाहे वह जमीन भारत में विलय से पहले किसी की निजी जमीन ही क्यों ना हो. यहां किसी भी तरह के जमीन विवाद में देश के सुप्रीम कोर्ट या संसद को हस्तक्षेप (Interference) करने का अधिकार नहीं है. आर्टिकल 371एफ में यह भी कहा गया है, 'किसी भी विवाद या किसी दूसरे मामले में जो सिक्किम से जुड़े किसी समझौते, एन्गेजमेंट, ट्रीटी या ऐसे किसी इन्स्ट्रुमेंट के कारण पैदा हुआ हो, उसमें न ही सुप्रीम कोर्ट और न किसी और कोर्ट का अधिकारक्षेत्र होगा।' हालांकि, जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति के दखल की इजाजत है।

आर्टिकल 371G मिज़ोरम: इस आर्टिकल के तहत मिज़ोरम में ज़मीन का मालिकाना हक सिर्फ वहां बसने वाले आदिवासियों का है. हालांकि, यहां प्राइवेट सेक्टर के उद्योग (Industry) खोलने के लिए राज्य सरकार मिजोरम (भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन और पुनर्स्थापन) ऐक्ट 2016 (the Mizoram (Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement) Act, 2016) के तहत भूमि अधिग्रहण (land acquisition) कर सकती है.

आर्टिकल 371H अरुणाचल प्रदेश: राज्यपाल के पास राज्य के law & Order की situation पर विशेष अधिकार हैं और इसके आधार पर मुख्यमंत्री के फैसले को रद्द किया जा सकता है.

आर्टिकल 371J: अनुच्छेद 371 जे हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र के छह पिछड़े जिलों को विशेष दर्जा देता है. विशेष प्रावधान के लिए आवश्यक है कि इन क्षेत्रों (महाराष्ट्र और गुजरात की तरह) के लिए एक अलग विकास बोर्ड स्थापित किया जाए और शिक्षा और सरकारी नौकरियों में स्थानीय आरक्षण सुनिश्चित किया जाए. 

अनुच्छेद 371 को आसानी से संशोधित किया जा सकता हैं। इसके लिए न तो संबंधित राज्य की विधानसभा की अनुमति की जरूरत हैं और न ही संसद में 2/3 बहुमत की। हालांकि 6वीं अनुसूची में संशोधन करने के लिए संसद में 2/3 बहुमत की जरूरत होती हैं क्योंकि अनुसूची में किसी प्रकार का सुधार संवैधानिक संशोधन कहलाता हैं।

क्या है इनर लाइन परमिट’: इनर लाइन परमिट भारत सरकार द्वारा जारी एक आधिकारिक यात्रा दस्तावेज है जो एक सीमित अवधि के लिए एक Protected area में भारतीय नागरिक को यात्रा की अनुमति देता है। भारत में भारतीय नागरिकों के लिए बने इनर लाइन परमिट के इस नियम को ब्रिटिश सरकार ने बनाया था। बाद में देश की स्वतंत्रा के बाद समय-समय पर फेरबदल कर इसे जारी रखा गया। इनर लाइन परमिट देश के उत्तरपूर्व में बसे तीन खूबसूरत राज्य मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश एवं नागालैंड में लागू है।

जिन राज्यों में इनर लाइन परमिट बनाने का नियम है वहां के बॉर्डर पर बनवा सकते हैं। इसके अलावा दिल्ली, कोलकाता और गुवाहाटी में इनके ऑफिस भी है जहां से आप परमिट बनवा सकते हैं। आईएलपी बनाने के लिए पासपोर्ट साइज फोटो, सरकारी पहचानपत्र की जरूरत पड़ती है।  इसे बनवाने में 120 से 300 रुपए का खर्च आता है।

मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश एवं नागालैंड के लिए एक बार में 15 दिन के लिए आईएलपी परमिट मिलता है। अगर आप वहां और रुकना चाहते हैं तो इसे रिन्यूवल करा सकते हैं। अगर आप किसी ट्रैवेल एजेंसी से यहां के लिए पैकेज लेते हैं तो वो आईएलपी करा कर देते हैं