What is Article 370 in Constitution in Hindi - संविधान का आर्टिकल 370 क्या है?

What is Article 370 in Constitution in Hindi - भारतीय संविधान का आर्टिकल 370 जम्मू-कश्मीर राज्य को Special status provide करता है। आर्टिकल 370 भारतीय संविधान का एक विशेष अनुच्छेद यानी आर्टिकल है, जो जम्मू-कश्मीर को दूसरे राज्यों के मुकाबले कुछ Special rights provide करता है

What is Article 370 in Constitution in Hindi - संविधान का आर्टिकल 370 क्या है?

क्या है आर्टिकल 370 : भारतीय संविधान का आर्टिकल 370 जम्मू-कश्मीर राज्य को Special status provide करता है। आर्टिकल 370 भारतीय संविधान का एक विशेष अनुच्छेद यानी आर्टिकल है, जो जम्मू-कश्मीर को दूसरे राज्यों के मुकाबले कुछ Special rights provide करता है। भारतीय संविधान में Temporary, transitional और Special provision से जुड़े भाग 21 का आर्टिकल 370 जवाहरलाल नेहरू के Special intervention से तैयार किया गया था।

15 अगस्त 1947 की आजादी के बाद देश कई सारी छोटी-छोटी रियासतों में बंटा हुआ था। जिसे सरदार वल्लभ भाई पटेल ने अपनी कोशिशों से सभी रियासतों को एक सूत्र में बांधतें हुए भारतीय संघ (Indian Union) की स्थापना की। 1947 में बटवारे के समय जब जम्मू-कश्मीर को भारतीय संघ में शामिल करने का प्रोसेस शुरू हुआ तब जम्मू-कश्मीर के राजा हरिसिंह आज़ाद रहना चाहते थे। इसी दौरान 22 अक्टूबर 1947 को कबाइली लुटेरों के भेष में पाकिस्तानी सेना ने वहां हमला कर दिया जिसके बाद राजा हरिसिंह ने भारत में विलय के लिए सहमति दी।

कैसे बना था आर्टिकल 370 : सरदार पटेल के दूत यानि गोपालस्वामी आयंगर ने संघीय संविधान सभा में जम्मू-कश्मीर की शर्तो को मिलाकर बनाये गए आर्टिकल 306-A का format पेश किया, जो बाद में आर्टिकल 370 बन गया। जिसके बाद विलय की शर्तों की वजह से जम्मू-कश्मीर को भारत के अन्य राज्यों से अलग अधिकार मिल गए। जिसके बाद से कश्मीर के स्पेशल स्टेटस और अधिकार को आमतौर पर आर्टिकल 370 के नाम से जाना जाता है। 1951 में राज्य को संविधान सभा अलग से बुलाने की अनुमति दी गई। नवंबर 1956 में राज्य के संविधान का कार्य पूरा हुआ। 26 जनवरी 1957 को राज्य में विशेष संविधान लागू कर दिया गया।

जम्मू कश्मीर के पास क्या विशेष अधिकार (Special rights) हैं

1.आर्टिकल 370 के provisions के मुताबिक Parliament को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार है। 
2.किसी अन्य विषय से संबंधित कानून को लागू करवाने के लिए केंद्र को राज्य सरकार की सहमति लेनी पड़ती है।
3.राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्खास्त करने का अधिकार नहीं है। 
4.1976 का शहरी भूमि कानून भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता। 
5.भारत के अन्य राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकते हैं। 
6.भारतीय संविधान का आर्टिकल 360 यानी देश में वित्तीय आपातकाल (Financial emergency) लगाने वाला प्रावधान जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता.

जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय करना उस वक्त की बड़ी जरूरत थी। इस कार्य को पूरा करने के लिए जम्मू-कश्मीर की जनता को उस समय आर्टिकल 370 के तहत कुछ विशेष अधिकार दिए गए थे। इसी की वजह से यह राज्य भारत के अन्य राज्यों से अलग है। 

आर्टिकल 370 की बड़ी बातें

1.जम्मू-कश्मीर का झंडा अलग होता है। 
2.जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता होती है। 
3.जम्मू-कश्मीर में भारत के National flag or national symbols का अपमान अपराध नहीं है। 
4.जम्मू-कश्मीर की कोई महिला यदि भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से शादी कर ले तो उस महिला की जम्मू-कश्मीर की नागरिकता खत्म हो जाएगी। 
5.यदि कोई कश्मीरी महिला पाकिस्तान के किसी व्यक्ति से शादी करती है, तो उसके पति को भी जम्मू-कश्मीर की नागरिकता मिल जाती है। 
6.आर्टिकल 370 के कारण कश्मीर में रहने वाले पाकिस्तानियों को भी भारतीय नागरिकता मिल जाती है। 
7.जम्मू-कश्मीर में बाहर के लोग जमीन नहीं खरीद सकते हैं। 
8.जम्मू-कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 साल होता है। जबकि भारत के अन्य राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल 5 साल होता है। 
9.भारत की संसद जम्मू-कश्मीर के संबंध में बहुत ही सीमित दायरे में कानून बना सकती है। 
10.जम्मू-कश्मीर में पंचायत के पास कोई अधिकार नहीं है।  
11.आर्टिकल 370 के कारण जम्मू-कश्मीर में सूचना का अधिकार (आरटीआई) लागू नहीं होता।  
12.जम्मू-कश्मीर में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) लागू नहीं होता है। यहां सीएजी (CAG) भी लागू नहीं है। 
13.कश्मीर में अल्पसंख्यक हिन्दूओं और सिखों को 16 फीसदी आरक्षण नहीं मिलता है। 

1947 को विभाजित भारत आजाद हुआ। उस दौर में भारतीय रियासतों के विलय का कार्य चल रहा था, जबकि पाकिस्तान में कबाइलियों को एकजुट किया जा रहा था। इधर जूनागढ़, कश्मीर, हैदराबाद और त्रावणकोर की रियासतें विलय में देर लगा रही थीं तो कुछ स्वतंत्र राज्य चाहती थीं। इसके चलते इन राज्यों में अस्थिरता फैली थी।

जूनागढ़ और हैदराबाद की समस्या से कहीं अधिक जटिल कश्मीर का विलय करने की समस्या थी। कश्मीर में मुसलमान बहुसंख्यक थे लेकिन पंडितों की तादाद भी कम नहीं थी। कश्मीर की सीमा पाकिस्तान से लगने के कारण समस्या जटिल थी अतः जिन्ना ने कश्मीर पर कब्जा करने की एक योजना पर तुरंत काम करना शुरू कर दिया। हालांकि भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हो चुका था जिसमें क्षेत्रों का निर्धारण भी हो चुका था फिर भी जिन्ना ने परिस्थिति का लाभ उठाते हुए 22 अक्टूबर 1947 को कबाइली लुटेरों के भेष में पाकिस्तानी सेना को कश्मीर में भेज दिया। वर्तमान के पाक अधिकृत कश्मीर में खून की नदियां बहा दी गईं। इस खूनी खेल को देखकर कश्मीर के शासक राजा हरिसिंह भयभीत होकर जम्मू लौट आए। वहां उन्होंने भारत से सैनिक सहायता की मांग की, लेकिन सहायता पहुंचने में बहुत देर हो चुकी थी।

भारत विभाजन के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की ढुलमुल नीति और अदूरदर्शिता के कारण कश्मीर का मामला अनसुलझा रह गया। यदि पूरा कश्मीर पाकिस्तान में होता या पूरा कश्मीर भारत में होता तो शायद परिस्थितियां कुछ और होतीं। लेकिन ऐसा हो नहीं सकता था, क्योंकि कश्मीर पर राजा हरिसिंह का राज था और उन्होंने बहुत देर के बाद निर्णय लिया कि कश्मीर का भारत में विलय किया जाए। देर से किए गए इस निर्णय के चलते पाकिस्तान ने गिलगित और बाल्टिस्तान में कबायली भेजकर लगभग आधे कश्मीर पर कब्जा कर लिया।