तीन तलाक़ देने पर क्या होगा? - Triple Talaq Explain in Hindi 2019

Triple Talaq Explain in Hindi 2019 - 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को इनवैलिड करार दिया और अब इसपर कानून बन चुका है। अब तीन तलाक देना एक क्राइम है और इसमें सजा का भी प्रोविज़न है।

तीन तलाक़ देने पर क्या होगा? - Triple Talaq Explain in Hindi 2019

एक मुस्लिम पति का अपनी पत्नी को एक ही जगह में एक बार में 3 बार तलाक़ तलाक़ तलाक़ कहना  या ये कहना की तुझे 3 तलाक है या लिखकर देना, इसको ट्रिपल तलाक़ कहा जाता है। 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को इनवैलिड करार दिया और अब इसपर कानून बन चुका है। अब तीन तलाक देना एक क्राइम है और इसमें सजा का भी प्रोविज़न है।

मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) अध्यादेश- 2019 के तहत तीन तलाक अवैध, अमान्य है. इसके मुताबिक अगर कोई भी पति अपनी पत्नी को तीन तलाक देने की कोशिश करता है तो उसे इसके लिए तीन साल तक की कैद की सजा हो सकती है.

1.मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि कोई मुस्लिम पति अपनी पत्नी को मौखिक, लिखित या इलेक्ट्रानिक रूप से या किसी अन्य विधि से तीन तलाक देता है तो उसकी ऐसी कोई भी Announcement शून्य और अवैध होगी।

2.तीन तलाक देना गैरजमानती और संज्ञेय अपराध है, बिना वारंट के पुलिस गिरफ्तार करेगी लेकिन संज्ञेय उसी केस में होगा, जब महिला या उसका कोई सगा-रिश्तेदार शिकायत करे

3.तीन तलाक़ देने वाले पति को तीन साल के कारावास की सजा होगी

4.तीन तलाक की विक्टिम महिला अपने पति से खुद के लिए और अपनी बच्चों के लिए गुज़ारा भत्ता प्राप्त पाने की हकदार होगी। गुज़ारे भत्ते के रूप में कितने पैसे दिए जाने चाहिए, इस रकम को मजिस्ट्रेट निर्धारित करेगा।

5.तीन तलाक देने वाले आरोपी को जमानत के लिए मजिस्ट्रेट का दरवाजा खटखटाना होगा। यानी मजिस्ट्रेट ही उसे जमानत दे सकता है। हालांकि, इसके लिए दोनों पक्ष की दलील सुनना अनिवार्य है।

6.अगर तीन तलाक देने वाला समझौता करना चाहता है, तो पहले इसके लिए तीन तलाक की विक्टिम महिला की रजामंदी की जरूरत होगी। यानी महिला की request पर ही मजिस्ट्रेट समझौते की मंजूरी दे सकता है